
कविताएं हृदय में उठ रहे अंतरंग भावों की अभिव्यक्ति होती है ,,,,
कविताएं सहज सरल स्वाभाविक प्रस्तुत होती हैं।
कविता बनाना नहीं पड़ती स्वयं अपने हृदय से निकलकर बाहर आ जाती है,,,
हृदय में उठे भावों को कलम से संजोग कर उन्हें कागज पर उतार लेना ही कविता का जन्म होता है,,,
कविता सदैव प्राकृत होना चाहिए,,
कविता कभी भी तुकबंदी नहीं होती,,,।
गीत और कविता हृदय में उठे भावों की सत्य अभिव्यक्ति होती है,,,
बाबूजी बालकवि बैरागी जी कहते थे ,,
बेटा कभी भी हृदय के भावों को निष्फल नहीं करना उन्हें कागज पर उतार लेना ही हमारी लेखनी का धर्म है,,।
संत तुलसीदास कहते हैं की कविता सदैव लोक कल्याणकारी होती है प्रेरणास पद होकर सभी के लिए अनुकरणीय होती है।
उसमें सदेव लोकमंगल की कामना छुपी रहती है।
राजेंद्र कुमार तिवारी











