
आलेखः आत्मनिर्भर भारत का सपना केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि तकनीकी स्वावलंबन की नींव पर खड़ा है। विज्ञान-प्रौद्योगिकी ने उन कड़ियों को इस तरह से जोड़ा है जहाँ आयात घटता जा रहा है, नव-उद्यम जन्म लेते दिखाई दे रहे हैं और गाँव-शहर दोनों को ठोस लाभ मिलता है।
कृषि-खाद्य सुरक्षा: डीएनए-आधारित फसलें (Bt-कपास, सूखा-सहिष्णु धान) ने उपज 20-30 % बढ़ाई, कीटनाशक खर्च घटाया। ड्रोन-सेंसर और मोबाइल ऐप से किसान रीयल-टाइम में मिट्टी-नमी, बीमा और मंडी-भाव देख सकते हैं। इससे “लैब-टू-लैंड” मॉडल ने आत्मनिर्भरता की जड़ें गहरी कीं। वहीं ड्राप सिंचाई पद्धति के सहारे आज भारत आत्मनिर्भरता से आगे बढकर निर्यात के लिए बाजार तलाश रहा है।
स्वास्थ्य-सुरक्षाः कोविड-19 के दौरान भारतीय वैक्सीन्स (कोवैक्सिन, कोविशील्ड) का तेज़ विकास और उत्पादन ने दिखाया कि देश बड़े-पैमाने पर जीवन-रक्षक दवाएँ खुद बना सकता है। आयुष्मान भारत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, जेनरिक-दवा उत्पादन (वैश्विक 20 % सप्लाई) से वर्तमान में संपूर्ण विश्व लाभान्वित हो रहा है और टेली-मेडिसिन ने आयात-निर्भरता भी घटायी।
ऊर्जा और जलवायु: 2024 तक 180 GW नवीकरणीय क्षमता (सौर-पवन) स्थापित—अब आयातित कोयले-तेल पर निर्भरता घटी। ISRO के लॉन्चर्स ने विदेशी सैटेलाइट भेजकर आय अर्जित की, जबकि NavIC ने स्वदेशी नेविगेशन दिया। हरित हाइड्रोजन, बैटरी-स्टोरेज मिशन शुद्ध ऊर्जा की ओर भारत के बढ़ते कदम प्रशंसनीय हैं।
डिजिटलीकरण एवं उद्योग:5G, भारत-स्टैक (UPI, आधार, डिजिलॉकर) ने ग्रामीण भुगतान, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और छोटे व्यापार को डिजिटल बनाया। “मेक इन इंडिया” से मोबाइल, रक्षा उपकरण और अंतरिक्ष घटकों का निर्यात बढ़ा; आज दुनियां में भारत मोबाइल हब बनता जा रहा है। स्टार्ट-अप-इंडिया ने 100 + यूनिकॉर्न खड़े किए।
चुनौतियाँ: R&D बजट अभी भी GDP का ∼0.7 % है (लक्ष्य 2 %); ग्रामीण प्रयोगशालाएँ, विज्ञान-शिक्षा की गुणवत्ता, तथा नियामक देरी को तेज़ करना होगा। बौद्धिक संपदा का अनुवाद और निजी-सार्वजनिक साझेदारी को मजबूत करना ज़रूरी है। वर्तमान में एआई वैश्विक सम्मेलन तकनिकी क्षेत्र में भारत के नेतृत्व कि ओर बढते कदम सराहनीय है।
आगे का मार्ग: राष्ट्रीय अनुसंधान फ़ाउंडेशन से दीर्घ-परियोजनाओं को फंड। स्कूल-स्तर पर हाथ-से-प्रयोग, कोडिंग और AI शिक्षा आरंभ करना शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल है।
राज्य-स्तर नव-प्रयोग (डेल्टा-फ़ॉर्म) को राष्ट्रीय मंच।
विज्ञान ने कृषि-भंडार, स्वास्थ्य-कवच, ऊर्जा-स्वतंत्रता और डिजिटल-बाज़ार को सशक्त कर आत्मनिर्भर भारत को विचार से उत्पादन तक पहुँचाया है। निरंतर निवेश और समावेशी नीति से यही विज्ञान आगे भी देश को आत्म-निर्भरता की नई उँचाइयों पर ले जाएगा।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।











