
पहला कदम जीवन में हमारा, दृढ लक्ष्य हो,
जीवन के आनंद लेने का, एक ठोस मकसद हो।
दूसरा कदम, प्रतिदिन के कामों की हो लिस्ट,
जब क्रमबद्ध काम करोगे, नित तभी होगे संतुष्ट।
तीसरा, कार्य की प्राथमिकता नित तय करो,
महत्वपूर्ण कामों को सबसे पहले जीवन में करो।
चौथा, समय सीमा को जरुर निर्धारित करो,
जीवन में कार्य को दिल-दिमाग से किया करो।
पाँचवा, कार्य के बीच में ब्रेक लेना न भूलो,
शरीर को दो थोड़ा विश्राम, समझदारी से चलो।
छठा, टेंशन से बचो, काम पर ध्यान लगाओ,
करो समय का सदुपयोग, यही सबको बताओ।
सातवाँ, कार्य की समीक्षा करो समय-समय पर,
कार्य को प्रारम्भ करने में, ना करो कभी इंतज़ार।
आठवाँ, जीवन में नित सकारात्मक सोच रखो,
जब हो कठिनाई, तो समाधान को पहले खोजो।
नौवाँ, जीवन में नित प्रेम व अनुशासन से रहो,
मानसिक व शारीरिक रूप से हमेशा स्वस्थ रहो।
दसवाँ, माता-पिता जी का नित लो आशीर्वाद,
नहीं मिलेगा मौका दुबारा, उनके जाने के बाद।
यही है, समय प्रबंधन की, सुन्दर अद्भुत कला,
जो इसे समझ गया, उसका जीवन ही बदला।
यह जीवन को अनुशासित, रखने का नियम है,
जीवन में लागू करना, निर्णय तो निज का ही है।
योगेश गहतोड़ी “यश”











