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नारी


विधा-काव्य

हे नारी तू स्वरूपा नारायणी है
समस्त संसार की जन्मदायिनी है

तन से कोमल मन से मजबूत तू संसार की शक्तिस्वरुपा हो
आधी आबादी की स्वामिनी तुम हर दायित्व मे अजूबा हो

समानता का हर अधिकार तुमने लड़कर पाया है
समाजिक सहिष्णुता समानता को तुमने मनवाया है

माँ बहन बेटी बहु पत्नी बन हर किरदार निभाया है आपातकाल मे परिवार समाज क्या समस्त संसार को बचाया है

स्वरचित एवं मौलिक
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

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