
कोलिया गाँव के बीच बाजारां,
लोग यूं गैरां खेलण लाग्या हो।
अबीर गुलाल के गुब्बार उडा़वें,
मिलकर चंग पर धमाल मचावें हैं।।
कोई पुलिस अफसर बणके आया,
कोई यों सेंठा को सांग निभावे हैं।
वों नागौरी गौरी रो श्रृंगार करावें हैं,
कोई दुल्हन रो स्वांग भी रचावै हैं।।
काकोसा अपणी मूँछ मरोडे़,
फागण मांही गुलाल उडा़वें हैं।
छैला बणके यों आये भाईसा,
आपणे चंग पर थाप लगावें हैं।।
यहाँ डांडिया यूं जुड़ने लाग्या,
वो सब चंग पर होली गावेंं है।
बेर भाव सब भुलण लाग्या,
फागण रो धमाल मचावें है।।
सांझ हुई रंग बरसण लाग्यो,
वो झुक झुक यूं लूरां गावें है।
मिनखां रो ओ मैलो मंडिंंयो,
सगला मिलकर फाग रचावें हैं।।
लोग लुगायां सब देखण आवें,
सब खुशियाँँ मिलकर मनावें हैं।
देखों होली रो त्यौहार हैं आयो,
हिलमिल यूं प्रेम रस बरसावें है।।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।










