
फागुन मे फाग गाएँ, सब जन
रंगों से खेले,भीगे तन मन
मस्ती मे मस्त है,डाले गुलाल
रंग पीला,हरा नीला और लाल
भेद भाव सब मिटा दो
गले लगे,पैर छू लो, रंग लगा दो
दो चार दिन की जिंदगी है
बस,जीयो और सबो को जीने दो
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड

फागुन मे फाग गाएँ, सब जन
रंगों से खेले,भीगे तन मन
मस्ती मे मस्त है,डाले गुलाल
रंग पीला,हरा नीला और लाल
भेद भाव सब मिटा दो
गले लगे,पैर छू लो, रंग लगा दो
दो चार दिन की जिंदगी है
बस,जीयो और सबो को जीने दो
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड
रक्षा बंधन
लक्ष्य प्राप्ति की राह
आँचल के उस पार
रास्ते का पत्थर
यथार्थ
प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक
कल्पकथा सम्मान समारोह जुलाई २०२६ में देश भर के विद्वान साहित्यकार सम्मानित
वाह गोपाल जी, बहुत बधाई हो!
कपिलश साहित्यकार समिति खुर्जा शाखा की काव्य गोष्ठी संपन्न
आँगन की चिड़ियाबेटी की बिदाई