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हमारा न्याय तंत्र

चोर तन्त्र भ्रष्ट तंत्र रिश्वत तंत्र न्याय तंत्र के पर्याय है कहना अपराध है
घूसखोरी कमीशनखोरी न्याय तंत्र की चक्की मे पिसता आम आदमी एक अभिशाप है

न्याय का मन्दिर पैसे के लूट का शानदार मन्दिर बन गया है
न्याय की आस मे आम आदमी बेभाव पिस गया है

न्याय और इलाज़ आम आदमी के निश्चित बरबादी के माकुल साधन है
जज डॉक्टर वकील इस साधन के पर्याप्त कारण है

गजब ये दबंगइ है वो जख्म पर जख्म दें हम आहें भी ना भरे
हक़ का न्याय भीख सरीके खैरात मे मिले

तारीखों के खेल मे इन न्याय के मन्दिरों मे इन्सान भटकता है
हक़ की लडाई मे जीवन एक गुजरता है

बेशर्मी जजों वकीलों के दूसरों के चूसे हुए खून है
जमीर भी इनका अपना क्या बिका हुआ किराये का सुकून है

न्याय तंत्र मे इन्साफ एक पुरकशिश स्वप्न समान है
न्याय की आस लगाना ही जीते जी मर जाने के समान है

संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

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