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अधूरी मोहब्बत की याद

तेरी यादों को दिल से कहाँ मिटा पाएंगे,
तू बुरा नहीं, ये हम खुद को समझाएंगे।

सच है कि अब किसी और के हो तुम,
पर तेरे हिस्से की मोहब्बत हम ही निभाएंगे।

झूठा नहीं था जो कभी आँखों में दिखता था,
वो हर एक पल हम सच्चाई से निभाएंगे।

वक़्त बदलेगा, लोग भी बदल जाएंगे,
पर तेरी वफ़ा के किस्से हम गुनगुनाएंगे।

अंधेरों में जब कोई साथ ना देगा,
तेरे दिए हुए जज़्बात ही दीप बन जाएंगे।

और जब कभी ज़िक्र होगा मोहब्बत का,
हम मुस्कुरा कर बस तेरा नाम बताएंगे
आर एस लॉस्टम

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