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चंद्शेर

कभी इंसा की भीतर भी,
वो मालिक बोल उठता है।2
मिले मौका वो इंसा को,
तो नसीब जाग उठता है।।2

नहीं रहता यहां कोई,
किसी का ना ठिकाना है।2
ये तेरा है वो मेरा है,,,,
ये झगड़ा तो पुराना है।।2

यहां जो कुछ भी उसका है
सभी कुछ मिटाने वाला है2
क्यों करता तेरी मेरी,,,
ये ना समझी का रोना है।2

समझ ले यार मलिक को
वही सब कुछ हमारा है।2
ना तेरा ही ना मेरा है,,,
यहां किसी का ना ठिकाना है।।2

राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर,
मध्य प्रदेश

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