Uncategorized
Trending

अनाम कातिल को नाम न दे कोई

अनाम कातिल को नाम न दे कोई
यह शख्स की इबादत है याद रहे गोई
वो जो सहम सा गया हैं हंसी को छिपाकर;
पता लगाओ तो वजह बदनाम न कर ज्यों ही।।

उसकी भोली मासूमियत को छीन है ले गया कोई
न आवाज हुई धक्क सी धिक्कार गया कोई
यह धारदार खंजर जो चुभाए है पीठ अपनी
क्या लगता नही भेदी कोई अपना ही है गोई।

तारूफ यह कि न नाम न पता ही है कोई
उस पर रंजिश की तंज कसे अपना ही कोई
पर कौन सभी मौन और मुंह पर मीठी मीठी बाते
तुम्हे लगता नही सरल काम आसान नही कोई।।


हुए नाम बदनाम और फैली खबर जो निर्मोही.
उसने लगाई मौत गले कितना मुश्किल था सच वो ही
इतनी आसान लगी मरने की बात उसको साहिब
यह सच है कातिल अनाम किंतु अपना ही है कोई।।

संदीप शर्मा सरल।।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *