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पुस्तकें हमारी मित्र

विषय-” महत्व ” पुस्तकों का
गद्य विधा- कहानी

(मित्र के अनुरोध पर)

“महत्व” यदि हम इस शब्द को समझ जाते हैं।
तो जीवन सरल हो जाता है।
यदि हमारे जीवन में छोटी छोटी चीजों का,
महत्व नहीं है तो हम अपने जीवन के
महत्व को ही नहीं समझ पाते हैं।
महत्व हीन जीवन जीने वाला मनुष्य जीते जी मृत के समान है।
यदि सच में हम अपने जीवन के महत्व को समझना चाहते हैं तो
हमें सर्वप्रथम पुस्तकों के महत्व को समझना पड़ेगा।
पुस्तकें ही हमारी सबसे अच्छी और सच्ची दोस्त हैं।
पुस्तकें हमारे संपूर्ण जीवन का दर्पण हैं।
जिसमें हम हमारे जीवन की कमियों और अछाइयों को देख सकते हैं।
हमारे जीवन को आधार देकर ऊंचाइयों तक पहुँचाने का कार्य पुस्तकें ही करती हैं।
जिस प्रकार हमारी प्रथम गुरु हमारी माँ होती है,
उसी प्रकार
संस्कार, सदगुण, ज्ञान को देने वाली पुस्तकें होती हैं।
पथशाला में पहला कदम रखने से लेकर अपनी पहचान बनाने तक के इस सालों के सफर को बिना पुस्तकों के तय नहीं किया जा सकता।
जीवन के अंतिम दौर तक यदि हमारे मित्र के रूप मे पुस्तकें साथ हैं तो हम सुखी जीवन के साथ सुकून से मृत्यु को स्वीकार कर सकते हैं।
जीवन मे भौतिक उन्नति के साथ साथ aadhyatmik उन्नति भी उतनी ही जरूरी है।
आध्यात्म को समझने के लिए एक अच्छे गुरु के साथ आद्यात्मिक साहित्य को पढ़ना बहुत अनिवार्य है।
ये पुस्तकें हमारे अंत:करण
को शुद्ध करती हैं।
जिन्होंने पुस्तकों से मित्रता कर ली उन्होंने अपने जीवन के मूल्य को समझ लिया है।


लेखिका- सुनीता बोपचे(गंगा)
शा उ मा वि बकोडी (सिवनी)

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