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बेइंतहा इश्क़ का ख़ामोश हिसाब

अब भी मैं इश्क़ बेइंतहा करता हूँ,
खामोश रहकर भी तेरा ही ज़िक्र किया करता हूँ।

वक़्त बदला, लोग बदले, हालात भी बदल गए,
पर दिल है कि आज भी तुझी पे मरता हूँ।

ना कोई शिकवा, ना कोई गिला है अब,
बस तेरी यादों में खुद को जिया करता हूँ।

तू दूर है तो क्या हुआ, एहसास तो पास है,
हर धड़कन में तुझे महसूस किया करता हूँ।

अब भी मैं इश्क़ बेइंतहा करता हूँ…
हाँ, बस अब पहले जैसा इज़हार नहीं करता हूँ।

अब भी मैं इश्क़ का हिसाब नहीं रखता,
बस तेरे ना होने का मलाल रखता हूँ।

वक़्त ने सिखा दिया चुप रहना मगर,
दिल में तेरे नाम का ख्याल रखता हूँ।

लोग पूछें तो मुस्कुरा देता हूँ मैं,
अंदर ही अंदर कई सवाल रखता हूँ।

तू मिला नहीं तो क्या, ये कम भी नहीं,
मैं तेरी यादों का ख़याल रखता हूँ।

अब भी मैं इश्क़ का हिसाब नहीं रखता,
बस तेरे ना होने का मलाल रखता हूँ।

आर एस लॉस्टम
लखनऊ

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