
नहीं मरती ख्वाहिशें, आँखों में जो जले।
छोटे-छोटे सपनों से मन को जो संजले।।
हर सुबह उठते हैं उम्मीद की किरणों संग।
हर शाम ढले फिर भी न थके व भरते नई उमंग।।
जो चाहतें अधूरी रह गईं राह में कभी।
वे लौट आती हैं दिल के गहरे सफ़र में अभी।।
बाधाएँ हों चाहे कितनी, रुक न सकें कदम।
मन में जलती ख्वाहिशें करती हैं मुश्किलें कम।।
हर धड़कन में छुपा है एक नया उत्साह।
हर सांस में छुपी है नयी उम्मीद की चाह।।
मेहनत करने वालों को ही मिलती है नेक राह।
हे मेरे मालिक! आप रखना सदैव अपनी पनाह।।
नहीं मरती ख्वाहिशें, न थकती कभी किसी की कहानी।
जीवन के हर मोड़ पर बुनती है नई ऊर्जा अपनी रवानी।।
सदा सलामत रहे इस जहाँ में मेहनतकश की ज़िंदगानी।
अथक प्रयास करने वाले ही लिखते हैं अपनी वीर-कहानी।।
अंत में नहीं मरती ख्वाहिशें, इन्हें पूरा करने की कोशिश कीजिए।
काग़ज़ और कलम की ताकत के बल पर अपनी चाहतें पूरी कीजिए।।
कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)













