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एक चुटकी

एक चुटकी,,,,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

आज के हालात,,,।।
ना जिंदगी का ठिकाना है
और ना मौत का कोई भरोसा है ,,,।

आदमी बस ,असमंजस में यूं ही जी रहा है,
करना है, जो भी,
वोआज ही कर गुजरो,,यारो
कल का किसी को कोई ना भरोसा है ,,,

आदमी की उम्र और वक्त
कौन कब ,करवट ले ले,,
वो कब मौत के आगोश में आ जाए,,
कभी कोई ठिकाना ना है,

रहते वक्त और हालात के
अच्छा क्यों कर नहीं लेते,,

पहले की बातें भूल जाओ
आजकल इन गर्म जहरीली हवाओं में,,
मौत के लिए ,,,बस,,,एक हवा का झोंका ही काफी है,,,
,,,,राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश

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