
मजदूर हूँ मेहनत पर ही जीवन अपना बसर करता हूँ
हाथों की लकीरों को अपने ही दम से लिखता और मिटाता हूँ
कमाता हूँ खाता हूँ रात एक नीन्द सो जाता हूँ
मेहनत से ज़िन्दगी की एक नई इबारत लिख जाता हूँ
मेहनत को ही अपनी हाथ की लकीर समझता हूँ
मजदूर हूँ मेहनत पर ही जीवन अपना बसर करता हूँ
जीवन को आकार देना ही अपना मुकाम समझता हूँ
तसल्ली को पल्लू से बांधकर इत्मीनान की कसर रखता हूँ
जिन्दगी से कोई ना रंज रखता हूँ
किस्मत पर ना कोई यकीं रखता हूँ
मेहनत पर ही करम की कसर रखता हूँ
मजदूर हूँ मेहनत पर ही जीवन अपना बसर करता हूँ
सीधा हूँ इमानदार हूँ भगवान से डरता हूँ
प्रपंच कुछ नही आता सीधा रास्ता ही चलता हूँ
इमानदारी की नमक रोटी को प्रभु का प्रसाद समझता हूँ
अपने हुनर से दुनियाँ को सँवारता हूँ
फ़ौलाद अपनी भुजाओं से पत्थर को तराशता हूँ
कोई किसी से गिला नही तकदीर पर खुद की नज़र करता हूं
मजदूर हूँ मेहनत पर ही जीवन अपना बसर करता हूँ
जीवन के कठौर धरा ही मेरा बिचौना है
हल औज़ार ही मेरा खिलौना है
मेहनत के पसीने से उपजी फसल ही हमारा सोना है
मेहनतकश है नेमत पर ही जीवन फखर करता हूँ
मजदूर हूँ मेहनत पर ही जीवन अपना बसर करता हूँ
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र













