
बेटी के रहते…….
स्वर्ग सी लगती दुनिया सारी है।
बेटी प्यार भरी फुलवारी है।
सुनी कहानी बहुत परियों की,
बेटी परियों की रानी है।
उम्मीदों की किरण पिता की,
माँ के सपनों की कहानी है।
खामोशी से हर बात समझती,
ममता की धारा बन जाती है।
बेटी के रहते छोटी सी कुटिया,
भी महलों से प्यारी लगती है।
खुशियाँ फैलाती प्यार बाँटती,
बेटी तो घर की लक्ष्मी होती है।
दिल में ख्वाहिशें आँखों में सपने ले,
दुनिया में परिवार की शान बढ़ाती है।
घर को स्वर्ग बनाने हेतु बेटी,
ममता की धारा बन बह जाती है।
होता विवाह ससुराल वो जाती,
दोनों कुल का मान बढ़ाती है।
सहयोगी बन अपने पति की,
मिलकर घर संसार चलाती है।
कष्ट कभी कोई पति पर आये,
दुर्गा बन आगे हो जाती है।
हैं संस्कार अगर बेटी के अच्छे तो,
बेटी एक सशक्त परिवार बनाती है।
बेटी प्यार भरी फुलवारी है।
रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)









