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एक भूखी माँ

माँ शब्द में मानो पूरी
कायनात बसती है।
माँ ही तो इस दुनिया की
सबसे बड़ी वो हस्ती है।
फिर जानें क्यूँ एक माँ ही
खुशियों को तरसती है।
एक भूखी माँ जब
दर दर भटकती है।
जैस तैसे अपने
बच्चों का पेट भरती है।
उसका दुख ना जाने कोई
जिंदा है न मरती है।
होगा कैसा लगता जब वो
भूख से बिलखती है।
माँ का बखान कर सकूँ
ऐसी मेरी कहाँ हस्ती है।
फिर जाने क्यों एक माँ ही
खुशियों को तरसती है।
एक भूखी माँ जब
दर दर भटकती है।
माँ शब्द में मानो
पूरी कायनात बसती है।
माँ ही तो इस दुनिया की
सबसे बड़ी वो हस्ती है।

रचनाकार- हेमंत कुमार पवार सिवनी (म प्र)

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