
अबला नहीं, सबला कहो, नारी सखी,बन ही रहो।
देवी तुम्हीं, मैया तुम्हीं, जीवन सभी, नैया तुम्हीं।।
बालक सभी, नादान हैं, आशीष दे, रख मान है।
आकर अभी, बस प्यार दो, नैया बहे, भव तार दो।।
अनिता श्रीवास्तव

अबला नहीं, सबला कहो, नारी सखी,बन ही रहो।
देवी तुम्हीं, मैया तुम्हीं, जीवन सभी, नैया तुम्हीं।।
बालक सभी, नादान हैं, आशीष दे, रख मान है।
आकर अभी, बस प्यार दो, नैया बहे, भव तार दो।।
अनिता श्रीवास्तव
वक्त निर्देश शिरोधार्य कर रहा हूँ
हिंदुत्व और साजिश
उलझन मे हूँ
जब मिलेगी तुम
तेरे दर पे पुजारी बन के आए हैं
भक्त के भेष में चोर
प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक
चलो कल को कला में कुछ बना कर दिखाएं
खुर्जा के वरिष्ठ कवि डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी ” मातृभाषा साहित्य भूषण सम्मान ” से किए गए सम्मानित
कृतज्ञता के पुष्प