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अज्ञान तम मिट जाए

गुरु चरणों में सत्य है, जीवन का हर राज।
श्रद्धा-विश्वास से साध लो, सफल बने हर काज॥

गुरुवर पर श्रद्धा रखें, हृदय रखें विश्वास।
निर्मल होगी बुद्धि तब, जैसे रुई-कपास॥

विश्वास पात्र में मिला, श्रद्धा-अमृत धाम।
प्राण-प्रज्ञा प्रभा से ही, जगमग हो सब काम॥

बिगड़ी बातें बन गईं, मिटा गया हर शूल।
शरणागत हो अर्पित करें, श्रद्धा सुमन के फूल॥

गुरु से पाया ज्ञान जब, सूरज-सी उजियारी।
साधन जागी चेतना, खिल उठी तरुणाई॥

गुरु कृपा से सिद्धियाँ, अंतर में विस्तार।
दीप जले दीप से फिर, हो जग में उजियार॥

आप हमारे सर्वस्व हैं, हे गुरुवर भगवान।
श्रेष्ठ विचार-आचरण से, बढ़े आपका मान॥

श्रद्धा-प्रज्ञा युग्म को, नित करें प्रणाम।
ऐसी शक्ति दीजिए, जागे आत्मा-ज्ञान॥

गुरु चरण की धूल से, जीवन हो निष्काम।
अज्ञान तम हर ले प्रभु, जगे भीतर राम॥

सतपथ पर दृढ़ चलें सदा, लेकर गुरु का नाम।
कृपा छाया में आपकी, मिले मोक्ष का धाम॥


डाॅ सुमन मेहरोत्रा’सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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