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देश का गुणगान

देश का अन्न खाते हो,
तो उसका गुणगान ज़रूरी है।
जिस पावन मिट्टी ने जीवन दिया,
उस मिट्टी का सम्मान ज़रूरी है।
यह राम की धरती है,
यहाँ राम-राम कहना ज़रूरी है।
मर्यादा, संस्कृति और संस्कारों का,
हर हृदय में स्थान ज़रूरी है।
जिस अन्न से यह तन पुष्ट हुआ,
उसका ऋण चुकाना ज़रूरी है।
भारत माँ के चरणों में,
श्रद्धा से शीश झुकाना ज़रूरी है।
सिर्फ अधिकारों की बात नहीं,
कर्तव्यों का ज्ञान ज़रूरी है।
जो इस देश में रहते हैं,
उनके लिए राष्ट्र का सम्मान ज़रूरी है।
यह वीरों की जननी, राम की भूमि,
इसका जयगान ज़रूरी है।
देश का अन्न खाते हो,
तो देश का गुणगान ज़रूरी है।

आर एस लॉस्टम

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