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मां मेरा ब्रह्मांड

मां मेरे लिए कोई शब्द नहीं 

वह पूरा का पूरा ब्रह्मांड है। 

त्रिदेवों की छवि उसमें!  

मां दुर्गे सी शक्ति अपार है।

त्रिदेवों सी सृष्टि कर्ता पालन कर्ता 

दया, करुणा, ममता, रूपी… 

संस्कार देकर मुझ में छुपी, 

बुराइयों का वही है, संघार कर्ता।

नहीं कोई कागज कलम जो… 

वर्णन करूं मैं उसके ममत्व का। 

बस करती हूं दुआ रहे सलामत वो! 

मिलता रहे सौभाग्य उसके स्पर्श का।

धुरी है जीवन की वह मेरी 

परिधि उसके प्यार की कोई नहीं। 

पाप पुण्य की सीमा से परे वो

उसके जैसे जगत में कोई नहीं।

स्नेह से भरा आंचल उसका 

मुख से आशीर्वाद ही बरसते।

मैं अकिंचन लिखूं क्या उस पर

उसकी गोदी को देवता भी तरसते।

उर्मिला ढौंडियाल ‘उर्मि’ 

                 देहरादून (उत्तराखंड)

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