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माँ: कुंडलियाँ छंद

माता ममता खान है,
मां कोमल एहसास।
माँ ही सचमुच ईश है,
मां सुख का आभास।।

माँ सुख का आभास,
मित्र और प्रथम गुरु है।
देती अपना रक्त,
गर्भ से सीख शुरू है।।

वंदन करें प्रशांत,
माँ तुझे शीश नवाता,
मुझ में जीवित अंश,
तेरा दिखता हे! माता।।

भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश

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