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अधूरी प्रीत का कबीर

मनवा लागो तोहसे रे, पर तोहे खबर न होय,
हमरी सांसन में तू बसे, तोरे मन हम न कोय।
नैनन बाट निहारते, दिनवा बीते रात,
तोरे हृदय में प्रेम ना, फिर भी तोरी बात।
हमने चाहा चाँद सम, तू अंबर की छाँव,
हमरी प्रीत अधूरी रही, फिर भी तोरो नाव।
तोहे पाना भाग न था, चाहत रही फकीर,
बिन माँगे दिल दे दिया, यही प्रेम की पीर।
साँचो प्रेम न सौदा है, ना मिलन की आस,
जियत रहो तू खुश सदा, बस इतनी अरदास।
कहत कबीर सुनो भई साधो, प्रेम बड़ा निष्काम,
जाके दिल में लोभ नहीं, वही समझे प्रेम धाम।

आर एस लॉस्टम

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