
गीत सृजन
मुखड़ा
ऐ माँ तेरी सूरत से अलग,
भगवान की सूरत क्या होगी।
तेरे चरणों की धूल जहाँ हो,
वो धरती ही जन्नत क्या होगी।।
तेरी ममता की छाँव मिली तो,
जीवन में हर राहत होगी।
ऐ माँ तेरी सूरत से अलग,
भगवान की सूरत क्या होगी।।
जब भी मन पर घोर अँधेरा,
तू दीपक बन जल जाती है।
सूखे मन के वीराने में,
सावन बनकर छा जाती है।
तेरी दुआओँ के आगे तो,
हर दौलत भी छोटी होगी।
ऐ माँ तेरी सूरत से अलग,
भगवान की सूरत क्या होगी।।
खुद भूखी रह पेट भराया,
ममता का उपहार दिया।
आँसू अपने छुपा लिये पर,
हमको हर त्योहार दिया।
तेरे त्याग तपस्या आगे,
हर पूजा भी फीकी होगी।
ऐ माँ तेरी सूरत से अलग,
भगवान की सूरत क्या होगी।।
तेरे आँचल की ठंडी छाया,
लगती जैसे धाम कोई।
तेरी बोली मीठी लगती,
ज्यों वीणा का गान कोई।
तेरे बिन इस सूने जग में,
हर खुशियों की कमी होगी।
ऐ माँ तेरी सूरत से अलग,
भगवान की सूरत क्या होगी।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा’सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार












