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कल्पकथा साहित्य संस्था का मासिक सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी आयोजित

मां की ममता, राष्ट्रभाव, सनातन संस्कृति के आलोक में देश विदेश से जुड़े हिन्दी साहित्य प्रेमी सम्मानित

 प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम हिन्दी भाषा सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार सोनीपत हरियाणा की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि संस्था द्वारा सम्मान समारोह मई २०२६ एवं २४८वीं कल्पकथा काव्य गोष्ठी के आयोजन किए गए। 

 अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार डॉ. गजेंद्र हरिहरनों दीप की अध्यक्षता एवं वरिष्ठ समाजसेवी पत्रकार रघुवंशमणि सिंह के मुख्य आतिथ्य में कल्पकथा परिवार के यूट्यूब चैनल पर सीधे प्रसारण के सम्मान समारोह कार्यक्रम में ज्योति प्यासी कोआ कल्प शिल्प विभूषण सम्मान, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप को कल्प सृजन भूषण सम्मान, डॉ श्याम बिहारी मिश्र को कल्प कवि कुल गौरव सम्मान, विजय रघुनाथराव डांगे को कल्प वैचारिक शिखर सम्मान, भास्कर सिंह माणिक, कीर्ति त्यागी डॉ मंजू शकुन खरे, डॉ नलिनी शर्मा कृष्णा, को कल्प संवाद कौशल सम्मान, शोभा प्रसाद को कल्प सृजन कौशल सम्राट, कीर्ति त्यागी को कल्प सृजन कौशल मुकुट, सूर्यपाल नामदेव चँचल को कल्प सृजन कौशल प्रासाद सम्मान से सम्मानित किया गया, जबकि दैनिक कल्प सर्जना कार्यक्रम के पटल प्रभारियों डॉ जया शर्मा प्रियंवदा, ज्योति प्यासी, दीपिका वर्मा, प्रेमलता कुमारी, जितेंद्र शास्त्री, एवं अमित पण्डा अमिट रोशनाई को कल्प सर्जना ध्वजवाहक सम्मान से सम्मानित किया गया।

वहीं दूसरे दिन के भास्कर सिंह माणिक के मंच संचालन में विश्व मातृत्व दिवस विशेष २४८वीं मातृ शक्ति सम्मान विशेष साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र से जुड़े विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, के साथ हुआ जिसकी अध्यक्षता लखनऊ उप्र से पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव ने की तथा गरिमामय आयोजन में मुख्य अतिथि का कार्यभार डॉ ऊषा पाण्डेय शुभांगी जी ने निभाया।

काव्य गोष्ठी में मणिका वर्मा, सुरेश कुमार वर्मा रातावाल, संजुला सिंह संजू, प्रेमलता कुमारी, अमित पण्डा अमिट रोशनाई, डॉ जया शर्मा प्रियंवदा, बिनोद कुमार पाण्डेय, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, दीपिका वर्मा, अतुल कुमार खरे, नैन्सी श्रीवास्तव, रमापति मौर्य, भगवान दास शर्मा प्रशांत, शोभा प्रसाद, ज्योति प्यासी, मनोज मंजुल, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, श्रीमती सांद्रा लुटावन गणेश, दिनेश कुमार दुबे, दीदी राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र आदि ने काव्य रचनाओं से वातावरण सुवासित कर दिया।

कार्यक्रमों के अंत में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम की १५०वीं वर्षगांठ स्मरणोत्सव वर्ष पर राष्ट्रगीत गायन के पश्चात सर्वे भवन्तु सुखिन: शांति पाठ के साथ विश्राम दिया गया।

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