
पति सिर्फ एक शब्द नहीं,
ये सबसे महंगा सोना है।
हर कोई समझ नहीं पाता इसको,
बस इसी बात का रोना है।
प्यार बाँटता फिरता है वो,
क्या बदले में उसको मिलता है।
बोझ उठाता है हम सबका,
क्या ये कभी नहीं थकता है।
पत्नी की इच्छा को पूरा करने,
हर पल ये तत्पर रहता है।
उसकी भी कुछ इच्छाएँ होंगी,
क्या पत्नी को नहीं पता है।
सबकी खुशियों की खातिर,
वह भी खुश हो जाता है।
उसकी असली ख़ुशी कहाँ है,
क्या पत्नी को नहीं पता है।
शादी से पहले चहकने वाला,
अब क्यों उदास रहता है।
सबके चेहरे को वो पढ़ता है,
सबकी खुशियाँ उसे पता हैं।
लेकिन उस चेहरे पर पढ़ी उदासी,
क्या पत्नी को नहीं पता है।
दोनों पक्षों का कर सम्मान वह,
अपना फर्ज़ निभाता है।
पत्नी से भी इच्छा यही वो करता,
अंत में फिर थक सा जाता है।
शादी से पहले ना जाने वह,
कितने सपने सजाता है।
घर आएगी जब वह मेरे,
मेरे दिल की रानी होगी।
राज करेगी मेरे दिल पर,
वो बहुत संस्कारी होगी।
हर पल हँसते हुए इस घर को,
खुशियों से माकायेगी।
छल कपट नहीं है मेरे घर में,
आते ही समझ वो जायेगी।
माता पिता का ध्यान रखेगी,
उनको नहीं सताएगी।
कभी पिता से जिद वो करेगी,
माँ को खूब हँसायेगी।
भाई बहन का प्रेम हमारा,
उसको और बढ़ाएगी।
भांजे भांजी अभी बहुत हैं छोटे,
माँ बन उनको सिखाएगी।
छोटा सा परिवार है मेरा,
मिल सबसे खुश हो जायेगी।
हाथों में उसके जादू होगा,
मिल माँ संग पकवान बनाएगी।
प्यार भरा होगा घर में मेरे,
भोजन में प्रेम परोसेगी।
छोटी छोटी बातों पर ध्यान नहीं देगी,
सारे रिश्तों को अपनायेगी।
गलती अगर किसी से होगी,
कभी डाटेगी कभी समझ जाएगी।
कितना सुंदर ये सपना है,
जिसको बहुत प्यार से जीना है।
पति सिर्फ एक शब्द नहीं,
ये तो सबसे महंगा सोना है।
थोड़ा सा रुको, थोड़ा समझो,
किस कारण दुख उसको होता है।
पति की इतनी प्यारी सी बात,
क्या पत्नी नहीं समझ पाती ।
छोटी छोटी बातों का अर्थ हटाकर,
व्यर्थ को सामने ना जाने क्यों लाती।
पति को यदि हृदय से चाहती,
घर को स्वर्ग बना लेती है।
यदि क्या अच्छा क्या बुरा जानती,
अपना सम्मान बना लेती है।
परिवार के यश को फैलाती ।
कौन तुम्हें क्या कहता है और,
कौन तुम्हें क्या देता है।
मैं लोगों को क्या दे पायी,
इतनी सी बात समझ जाती है।
लक्ष्मी का रूप सदा बनकर वह,
हृदय पर राज सदा करती है।
जिस दिन पति हृदय बस जाए,
हमें बात समझ आ जाती है
पति सिर्फ एक शब्द नहीं,
ये तो सबसे महंगा सोना है।
हर कोई समझ नहीं पाता इसको,
बस इसी बात का रोना है।
रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)












