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अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस

परिवार एक रिश्तों का संगम है
अच्छे बुरे हर वक़्त को साथ मे सहजने का एक अविरल मन है

परिवार एक विशाल वटवृक्ष के सदृश्य होता है
रिश्तों रूपी हरी भरी शाखाओं से सुशोभित होता है

बुजुर्ग उस वृक्ष की वो जड़ें होते है जिससे वृक्ष हरा भरा होता है
जीवन की हर कस्मकसाहट से बेदाग बरी होता है

आंधी तूफान मे वृक्ष ही शाखाओं को संभालता है
हर विपत्ती से परिवार ही बाहर निकालता है

परिवार ही जीवन का आधार होता है
मनुष्यत्व के प्रमाणिक स्वरूप साकार होता है

प्रेम अपनापन का एक उदगम परिवार है
परिवार है तो जीवन का सार है।


संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

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