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जहाँ हरियाली की चादर है,


मन्नू वहीं चैन का यूं वास है।।

वहाँ वर्षा की यूंं भरमार है,
खुशहाली बडी़ ही कमाल है।
जहाँ हरियाली की चादर है,
मन्नू नित्य वहीं चैन का वास है।।

धन,धान्य भी होता भरपुर है,
चेहरे पर यूं सबके मुस्कान है।
ना ही बिमारी का कोई काम है,
तन मन से वो होते मजबूत है।।

जहाँ ना हरियाली छायी है,
वहीं पर मन सबका बैचेन है।
ईर्ष्या,द्वेष व अपराध भरपुर है,
मजबूरी से होता हाल बेहाल है।।

आओ मिलकर हरियाली लाए,
एक एक पेड़़ यूं हम भी लगाए।
भविष्य की धरोहर हम बचाए।।


मुन्ना राम मेघवाल ।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान

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