
“वट सावित्री व्रत”
आओ सब मिल मंगल थाल सजाओ।
आओ सब मिल मंगल थाल सजाओ।
आयो वट सावित्री व्रत आयो ss
आयो वट सावित्री व्रत आयो sss
प्राण प्रिया मैं अपने प्रियतम की,
सखी तुम भी मिलकर गाओ।
आओ सब मिल मंगल थाल सजाओ।
आओ सब मिल मंगल थाल सजाओ।
माना कि मुझ मे नहीं वो बल,
क्यूँ समझू मैं खुद को निर्बल।
त्याग तपस्या की हैं, सखी हम मूरत।
पूजा में निहारें अपने, पिया जी की सूरत।
हाथ में चूड़ी माथे, बिंदियाँ सजाओ।
आओ सब मिल मंगल थाल सजाओ।
हर एक स्वांस में आस भरी है,
रहूँ मैं सुहागन जब तक मेरी जिंदगी है।
वट सावित्री व्रत कर पाऊँ,
जब तक रहे ये जीवन, इसको निभाऊँ।
पाँवों में पायल माथे, सिंदूर सजाऊँ।
सखी तुम भी तो मेरे संग सज जाओ।
आओ सब मिल मंगल थाल सजाओ।
आओ सब मिल मंगल थाल सजाओ।
रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)












