
हे देवि ! दया कर दे, वर दे, मन
स्वस्थ सुखी रखिये, रखिये,
रोटी, कपड़ा, रहने को घर, वैभव
सुख से भूषित रखिये, रखिये।
जीवन साथी का प्रेम मिला,
संतानों से आदर, सद्भाव मिला,
एहसान नहीं कोई ऋण का,
अपनी कृषि, अपना व्यापार भला।
अनुराग पूर्ण जीवन मेरा,
दुश्मन को भी स्वजन बना पाऊँ,
भाई, बहन, सखा, सम्बन्धी
सब जन का हित मैं कर पाऊँ।
पार ब्रह्म के परम ज्ञान से ओत
प्रोत, हो प्रवीण मैं बन जाऊँ,
सत्संगी, संतोषी बनकर इस
समाज को गौरव दिलवा पाऊँ।
हे देवी ! तुम अंतर्यामी हो,
माँ, सबको सुख शान्ति दीजै,
दुखों से दूर रहे काया, सत
सेवा, धर्म क्षमा करने दीजै ।
दान दया व क्षमा की प्रवृति
इस जीवन में मैं अपनाऊँ,
आदित्य दया कर दे वर दे,
यह तन मन निर्मल रख पाऊँ॥
हे मातु दया कर दे वर दे …….॥
डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र,
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’,लखनऊ












