
हमारे देश में जबसे उदारीकरण हुआ
देश मे विदेशियों का जो अधिक
आवागमन हुआ
देश मे पाश्चात्य संस्कृति ने जबसे
पैर पसारे हैं
तन तो तनाव से हुआ है बीमार
मनों में भी बीमारी पाले हैं
हर कोई धर्म संस्कारों से धीरे धीरें
हो दूर चला
हर कोई मर्यादाओं को भी है
तोड़ चला
रिश्तों में भी पहले जैसी कहीं
नहीं मिठास रही
हर रिश्ते में प्रतिस्पर्धा बढ़ती
ही रही
एक दूसरे से नाप तौल के रिश्तें
निभाऐं जाते है
बच्चों बड़ो के पैकेज देखकर
रिश्तें बनाऐ जाते हैं
हर कोई दूसरें में कमियां
आज ढूढ़ रहा
हर तरफ दिख रही उत्साह
उमंग में रिक्तता
यूँ जीवन जी रहा इंसान
जैसे वो ही हो जग में सर्वेसर्वा
प्रभु का कोई डर भय नहीं
अन्तस् से क्या खोखला वह नही
शीलू जौहरी भरूच












