
सच एक टोटा है जबान पर किसी के आता नही
नाकामी खुद की कोई विद्वान कभी बताता नही
सच सुनना पसंद सबको है सच से सामना नहीं चाहिए
सच की ये बेजुबान हकीकत है सच कागज़ पर चाहिए
सच्चाई के मुहाने खड़ी इस दुनियाँ मे सच्चाई ही नदारद है
झूठ के संसार मे झूठ की ही सदारत है
सच्चाई के इम्तिहान मे ही नैकियत की ईबारत चाहिए
सच का कोई शिफा नही सच कागज़ पर चाहिए
गलतियों की इन्तिहाँ है खुद को पाक साफ बताते है
दुनियाँ की नज़र मे ही गलत को ही सच ठहराते है
दोषी है दोष को सामनेवाले पर ही मढ़ना आना चाहिए
समझना अब कुछ है ही नही सच कागज़ पर चाहिए
बदलते दौर मे बदलाव की ही चारों और आंधी है
सच बदला नही झूठ बोलने वाले की चांदी है
गर जीना है सच का झूठ और झूठ का सच करते आना चाहिए
सच से रूबरू हों ना हो सच हमेशा कागज़ पर चाहिए
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












