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मोहब्बत

खुद को तेरे यादों का गुलाम कर दिया,
तेरे खातिर खुद को बदनाम कर दिया ।
और क्या सबूत दूँ मैं अपनी मोहब्बत का ,
सीने में एक दिल था वो भी तेरे नाम कर दिया ।

रातों को जाग-जाग कर तेरा इंतज़ार किया,
हर दुआ में सिर्फ तेरा ही नाम लिया।
लोग कहते हैं इश्क़ में हद से गुजर गया हूँ मैं,
हाँ, तेरी खातिर मैंने खुदा से भी बैर कर लिया।

मेरी हर साँस में अब तेरा ही पैगाम है,
मेरी आँखों का हर ख्वाब तेरे नाम है।
तू मिले या ना मिले ये मुकद्दर की बात है,
पर मेरी रूह ने तुझे अपना मुकाम कर लिया।

तेरे शहर की गलियों से गुज़रना छोड़ दिया,
तेरे बाद मैंने में उतरना छोड़ दिया।
अब तो आइना भी पूछता है मुझसे अक्सर,
क्यों तूने हँसना और सँवरना छोड़ दिया।

तू अगर कह दे कि भूल जाऊँ तुझे,
तो ये साँसें भी रोक दूँ तेरे नाम पे।
पर ये दिल ज़िद्दी बड़ा, मानता ही नहीं,
इसने तो धड़कना भी कर दिया तेरे नाम पे।

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर महाराष्ट्र

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