
सुनो,कुछ कहना है,मुझे भी,
ये सुनना जरूरी है,तुझे भी,
माना लिखा गया सब तेरे नाम से,
मेरे नाम से भी है,कुछ अभी।
आया हूँ जैसे ही इस धरा मे,
व्यस्त रहा,सदा जिम्मेवार मे,
सबो को संभाले रखा,
घर के खातिर, परेशानी मे।
सुखमय रहे कैसे?,घर मे सब,
यही रहा सोचते हर वक्त ,
मायुसी ना छाये ,किसी के मन मे,
फीकी मुस्कान दिखाये,हर वक्त।
माना,आधी आबादी मे तु है,
हर गाथा मे समायी तु है,,
लेकिन मेरा भी संघर्ष कम नही
ये न समझती कभी,तु है।
दो बूँद अश्क बहा कर, तु,
सबो के प्रिय बन जाते हो,
दर्द सहे,कष्ट उठाये,यदि मै,
ये भी कभी समझाकर,तु।
भारी व्यस्तता के बावजूद भी,
मुस्कान बिखेरते रहता हूँ
ये भी तो समझो तु कभी
मुझे भी ज्यादा नही,कम खुशी दो,सही।
हमसफर हो मेरे,जिंदगी की
संग सदा रहती एक साथ
तेरे सारे परेशानी समझता हूँ
कुछ फर्ज निभाओ,तु भी।
मिलजुलकर साथ यदि,चलेगे
समस्या सारे,समाधान हो जायेगे
और न तो कम से कम
सामना करने का हौसला तो,रखेगे ।
चुन्नू कवि का यही है कहना ,
जैसे हो जहाँ तक हो,
साथ साथ ,मेरे रहना,
भार जिम्मेदारी का,मिलकर उठाना ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड












