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बचपन


वो बचपन की यादें
जब याद मुझे आती हैं,
वो बचपन की यादें।
दिल कहता है चल फिर,
बचपन को जी ले।
थोड़ा सा हँस ले, थोड़ा रो ले।

वो हँसी के पल,
तू अपनी जेब में रख।
टेंशन को तू भूल,
जीवन के मज़े ले ले।
थोड़ा सा हँस ले, थोड़ा रो ले।

जब कभी तुझको,
कुछ समझ न आये तो,
फिर जाने तू दे यार,
जीवन के मजे ले ले।
थोड़ा सा हँस ले, थोड़ा रो ले।

जरा सोच के देख,
कि अभी तू बच्चा है
भोली है सूरत तेरी,
तू दिल का सच्चा है।
मस्ती में तू झूम,
जीवन के मज़े ले ले।
थोड़ा सा हँस ले, थोड़ा रो ले।

दौड़ धूप के बाद,
जब तू थक जाता है।
गिरकर जरा संभल,
फिर वही जीतता है।
गिरने से न डर,
जीवन के मजे ले ले।
थोड़ा सा हँस ले, थोड़ा रो ले।

अपनों से हो तकरार,
या रूठ गया हो यार।
जरा सा तू भी रूठ,
खत्म कर तकरार।
सबके दिलों को जीत,
जीवन के मज़े ले ले।
थोड़ा सा हँस, थोड़ा रो ले।
दिल कहता है चल फिर,
बचपन को जी ले।

रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)

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