
घर में रावण एक नहीं, अब दस-दस निकले हैं।
बच्चे, बूढ़े, जवान सब मोबाइल में फँसे हैं।
सुबह उठते ही सबसे पहले रावण दर्शन होता है,
स्क्रीन जलते ही लगता है – “आज भी राम सोता है”।
खाते-खाते रील देखे, सोते-सोते चैट चले।
बीवी बोले “सुनो जी”, पर कान में हवा चले।
घरवाली पूछे “कहाँ हो?”, बोले “मीटिंग में हूँ मैं”।
असल में PUBG के मैदान में दुश्मन पीटिंग में हूँ मैं।
बच्चा बोले “पापा खेलो”, बोले “बेटा काम है”।
खुद ही गेम में उलझा, यही तो असली राम है!
रावण को जलाते हो हर साल मंच पर आके,
पर घर का रावण तो चार्जर में लगता है, देखो जाके।
इसलिए इस बार प्रण लो, मोबाइल थोड़ा दूर करो,
राम को जगाओ दिल में, और थोड़ा खुद से नूर भरो।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर महाराष्ट्र












