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एकदंत गणपति

एकदंत गणपति, है रतिउनकी भक्ति,
विध्न हर्ता श्री गणेश, घर में पधारिए।
रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ,अनोखी तुम्हारी आभ,
वक्रतुण्ड मनोहर, जीवन सुधारिए।

गौरी सुत गणराज, प्रथम पूज्य सुकाज,
भव सागर से तारे,दया अब कीजिए।
कर्ता मंगल विघ्नेश,अनुपम रूप वेश,
भक्त हृदय निवासे,संकट निवारिए।

लड्डू दूर्वा पान प्रिय, दीन हीन बसे हिय,
दर्शन वंदन कर,सोम रस पीजिए।
एकदंत बुद्धिनाथ, चरण नवाते माथ,
पाप सब क्षमा कर,शरण में लीजिए।

कर में अंकुश पाश, सबका जीवन खास,
तेरी कृपा सदा पायें,दास को स्वकारिए।
मूढमति लोभी हम,भक्ति भाव नहीं दम,
क्षमामूर्ति नाथ आप, बुद्धि हमें दीजिए।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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