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मेरे पिता मेरे आदर्श

पिता भोर की पहली किरण के सरताज हैं।
पिता तंद्रा भगाते स्फूर्ति के परवाज हैं।

पिता सृष्टि निर्माण की अभिव्यक्ति हैं ।
पिता से ही जीवन है, संबल शक्ति है।

पिता उंगली पकड़े बच्चे का सहारा हैं।
पिता सुरक्षा हैं , पिता पालनहार हैं।

पिता एक जीवन को जीवन दान हैं ।
पिता ही जगत में दिलाते पहचान हैं।

पिता अथक मेहनत औ’ हौसला दिलाते।
पिता कभी कांधे कभी साइकिल पर बिठाते।

पिता गृहस्थाश्रम में उच्च स्थिति की भक्ति।
पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ति।

पिता रक्त में दिए हुए संस्कारों की मूर्ति हैं।
पिता निज इच्छा दबा परिवार की करते पूर्ति हैं।

मुझे इस मुकाम पर पहुंचाने वाले पिता।
मेरी ताकत, मेरे आदर्श, मेरी पहचान पिता।

मेरे पिता मेरे आदर्श, निष्ठावान और मेहनती।
उनके आदर्श पथ की मैं अनुगामी दुनिया जान


डॉ सुमन मेहरोत्रा,
मुजफ्फरपुर,बिहार

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