
छल कपट के प्रपंच कर रहा सभापति सब देख रहें हैं।
रे कन्हैया कब तु आएगा दुशासन साड़ी खिंच रहा है।।
सबके सब अत्याचारी यहाँ है चारों तरफ अंधियारा है।
रे कन्हैया कब तु आएगा दुशासन साड़ी खिंच रहा है।।
शकुनि मामा के चाल में देखों पति फंसा मेरा जंजाल में।
एक तेरे शिवाय कौन बचाएगा मुझको रे कन्हैया इस हाल में।।
दुर्योधन पापी के आगे देखों करन भी चुप चाप खड़ा है।
रे कन्हैया कब तु आएगा दुशासन साड़ी खिच रहा है।।
अपने ही कुल वधू का वो देखों कर रहा अपमान है।
औरत पर बल दिखाकर खुदको समझ रहा बलवान है।।
सभापति सब सभा में देखों सबके सब यहाँ मौन खड़े है।
रे कन्हैया कब तु आएगा दुशासन साड़ी खिंच रहा है।।
गुरुद्रोण और भीष्म पितामह दोनों के दोनों असमंजस में है।
देखों पुत्र मोह धृतराष्ट्र पड़े हैं ज्ञानी भी कुछ न बोल रहें हैं।
अब तो आकर मेरी लाज बचा पति बना मेरा उन्ही का दास है।
रे कन्हैया कब तु आएगा दुशासन साड़ी खिंच रहा है।।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,












