
भाई-बहन का रिश्ता कितना प्यारा होता है,
थोड़ी सी नोंकझोंक में भी प्रेम छुपा होता है।
कभी रूठना, कभी मनाना चलता रहता है,
हर पल हंसी-ठिठोली का मेला सजा होता है।
बचपन की गलियों में संग खेला बचपन,
एक-दूजे के बिना सूना लगता जीवन।
छोटी-छोटी बातों पर तकरार भी होती,
पर दिल में बसती रहती स्नेह की ज्योति।
यह रिश्ता पवित्र है मंदिर की आरती सा,
जिसमें अपनापन हो माँ की ममता जैसा।
सम्मान की खुशबू हर रिश्ते में महकती,
हर मुश्किल में ये डोर साथ-साथ चलती।
भाई बहन की हँसी घर को स्वर्ग बनाती,
दुख की हर काली रात में रोशनी लाती।
भाई बहन का प्रेम अटूट कहानी है,
ईश्वर की दी हुई सबसे सुंदर निशानी है।
जब बहन उदास हो, भाई ढाल बन जाता,
हर आँसू को अपनी मुस्कान में छुपाता।
और बहन भी दुआओं में भाई को सजाती,
हर पल उसकी खुशियों की ज्योत जलाती।
न रिश्ता कोई इससे बढ़कर संसार में,
न इतनी मिठास किसी और प्यार में।
भाई-बहन का बंधन सदा यूँ ही बना रहे,
हर जन्म में ये प्रेम अमर बना रहे।
प्रोफेसर सुषमा देवी गुप्ता, संस्कृत विभाग
जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू












