
पल वो ही जो हमारे जीवन में घटित हो,
लेकिन हर वक्त हसीं हो, ये ज़रूरी तो नहीं।
किस्मत कहां लाकर छोड़ देगी हम सबको,
इस बात का भी तो अब कोई भरोसा नहीं।
इसीलिए जितना भी जीवन है हमें मिला,
हमेशा ख़ुश हो कर उसको गुजार तो सही।
वरना ईश्वर के घर से कब बुलावा आ जाये,
हमारी इस बात को अब तू मान तो सही।
सचमुच में जीवन-मरण का ये रहस्य,
किसी के भी बस का अब है ही नहीं।
सब कुछ ऊपर वाले की रजामंदी से ही है,
एकमात्र इस बात को स्वीकार कर तो सही।
दीपिका मोयल ‘दीप’
जोधपुर, राजस्थान












