Vijay Kumar
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साहित्य
पर्यावरण
ज्यादा से पेड़ लगाना चाहिएइनकी सदा रक्षा करना चाहिएभूमि पर हरियाली बढ़ाना चाहिएपर्यावरण में प्रदूषण दूर करना है। पेड़ पौधों…
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साहित्य
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साहित्य
प्रेम में दिखावे की जगह सच्चाई होती है
प्रेम में दिखावे की जगह सच्चाई होती है, स्वार्थ की जगह समर्पण होता है, और अधिकार से अधिक सम्मान होता…
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साहित्य
मैं तुझें लिखूंगा
एक रात एक बात लिखूंगा,तुझे मैं अपने साथ लिखूंगा। बड़ा सा चाँद ठंडी सी हवा,फिर तेरे हाथ में मैं अपना…
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स्त्री-पुरुष दोनों के संतुलित जीवन पर लेख
प्रस्तावना स्त्री और पुरुष समाज रूपी रथ के दो पहिए हैं। जीवन की गाड़ी तभी सुचारु रूप से चल सकती…
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साहित्य
पर्यावरण का नाश सृष्टि का विनाश
-गोवर्धन थपलियाल प्रकृति का शृंगार जग जीवन का आधारसृजन और विसर्जन नियति के सूत्रधारकितने फल फूल खोये व्यथित नही तरुवरचेताती…
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साहित्य
जागो रे इंसानों जागो
विषय – पर्यावरण दिवस जागो रे इंसानों जागो, कुदरत तुम्हें पुकारती,धरती मां व्याकुल बैठी है, कौन उतारे आरती? हरी चूनर…
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साहित्य
प्रेम, दया, आशीर्वाद गिनते रहिये
बीत गया जो, बदला कैसे जायेगा,मंतव्य वास्तविकता कैसे बतलाएगा,मंज़िल अलग, गंतव्य एक होता है,बीती बिगड़ी बातें भी बनते देखा है।…
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साहित्य
जल जंगल बचाओ लोगो
हमारी बस्ती में देखो आज कल,चिड़िया बहुत सारी चहचहाय रही हैं।जो पेड़ लगाए थे बुजुर्गों ने कभी,ये नई पीढ़ी फल…
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साहित्य
क्या से क्या हो गए देखते देखते
क्या ज़माना था वो, सबमें जज़्बात थी,सब सच्चे थे, उनकी मीठी बात थी।न जाने कहाँ खो गए, वो भाव संवेदना,विचार…
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