Vijay Kumar
-
साहित्य
भाग 2(खड़ावदा की आवाज)
कविताहमारे जनप्रतिनिधियों को कवि गोपाल जाटव विद्रोही का राम रामहमारे घर के सामने है रास्ता आमअक्सर हमारे घर के सामने…
Read More » -
साहित्य
माँ…
माँ, तू कैसे जान जाती हैमैं क्या कर रही हूँ हर पल,मेरे हर कदम की आहट कोकैसे पहचान लेती है…
Read More » -
साहित्य
माँ का आँचल : एक संस्मरण
मेरा सैनिक जीवन और मेरी दादी माँ, माँ मैं एक सैनिक हूँ,मैं अब रिटायर्ड हूँ,मेरी माँ की कहानी,मेरी अपनी जुबानी।…
Read More » -
साहित्य
पक्ष विपक्ष दुश्मन बन बैठे हैं
जल में रहकर मगरमच्छ से बैर,उन शैतानों के भी होते हैं दो पैर,बिना किसी प्रतिबंध वे घूम रहे हैं,छोटी बड़ी…
Read More » -
साहित्य
कर्म कर, फल की इच्छा न कर
पक्षी तो बिना किसी नक़्शे केअपने गंतव्य तक पहुँच जाते है,पर हम इंसान दिल से दिल तकपहुँचने में प्राय: नाकाम…
Read More » -
साहित्य
महाराणा प्रताप
(मुक्त छंद) अरावली की चोटियों परआज भी गूँजती है एक हुंकार—“स्वाभिमान कभी झुकता नहीं।”यह स्वर किसी साधारण राजा का नहीं,मेवाड़…
Read More » -
साहित्य
महाराणा प्रताप
सूर्यवंश मे जन्मे बलिष्ठ कद काठी के क्षत्रिय वो मेवाड़ के राणा प्रताप थेमुगलों के दांत खट्टे कर दे ऐसे…
Read More » -
साहित्य
भावनाओं के पंख
ओमपाल सिंह भावनाओं के पंख लगाकर,मन अक्सर उड़ जाता है,कभी खुशी के नीले अम्बर में,कभी दर्द में खो जाता है।…
Read More » -
साहित्य
प्रेम – मधुरिमा
जब प्रेम-मधुरिमा मन की वीणा पर झंकृत हो जाएगी,भावों की अनजानी सरिता अंतर्मन में बह जाएगी।नयनों की चंचल पंखुरियों पर…
Read More » -
साहित्य
मां होती है जन्नत का फूल
मां होती है जन्नत का फूलममता लुटाती मां का है उसूलमां का प्यार होता है अनमोलनहीं चुका सकता है कोई…
Read More »








