Vijay Kumar
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साहित्य
महिला नेतृत्व, एक नए युग की शुरुआत
आज जिंदगी की भागम -भाग मेंमहिलाएं कहां किसी से कम हैंबिल्कुल महिला का नेतृत्वएक नए युग की शुरुआत हैआजादी के…
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साहित्य
विरह का गहराव
सुनो, प्यार में तुम्हारे अब बदलाव हो रहा है,धीरे-धीरे धुएं के छल्लों में ढलाव हो रहा है।सूर्य की तरह बाहों…
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साहित्य
मंगलाचरण
जो सुमिरत सिधि होई,गन नायक करिबर बदन।करउ अनुग्रह सोइ,बुद्धि रासि सुभ गुण सदन।। मुक हो ई बा चाल,पंगु चढ़ई गिरवर…
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साहित्य
सृष्टि की रचयिता
मां शब्द में ही सारी सृष्टि समायी हैईश्वर ने स्वयं ही मां की महिमा गायी है**हर प्राणी में ईश्वर अंश…
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साहित्य
महाराणा प्रताप की जयंती
प्रसिद्ध हैं ये कथ्य धरा मे आज भी,कि घास रोटी खाई ,जारी रखी लड़ाई ,ना झूके कभी वो मुगलों के…
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साहित्य
माँ
माँ की महिमा लिखा न जाए ममतामई महान है।माँ ही कलम दवात है और माँ ही गुरु ज्ञान है।।माँ से…
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साहित्य
पल दो पल
पल दो पल ही सही,तुम साथ चलो। पल दो पल ही सही,चुप रहो, ना बोलो। ना तुम कुछ कहो, ना…
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साहित्य
व्यर्थ की चिंता क्यों करो
जिंदगी है चार दिनखुशियों से इसे भर लोतेरा मेरा के चक्कर मेंव्यर्थ की चिंता क्यों करो।जग में जब आये हैतो…
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साहित्य
अंतहीन उड़ान
अंतहीन उड़ान की सैर करना चाहती हूँ।मैं इस विश्व में खूब घूमना चाहती हूँ।। मेरे मन का पंछी आजकल नियंत्रण…
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साहित्य
माँ
माँ,तुम अब मेरे पास नहीं हो,तो ये घर सिर्फ दिवारों का ढांचारह गया है,तुम्हारी आवाज,प्रभात की वो रोशनी थी,जो थके…
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