Uncategorized
Trending

सृष्टि की रचयिता


मां शब्द में ही सारी सृष्टि समायी है
ईश्वर ने स्वयं ही मां की महिमा गायी है
**
हर प्राणी में ईश्वर अंश का दर्शन होता है
पर मां के रूप में ही ईश का अर्चन होता है
**
मां की दुनिया में पूरा परिवार समाया है
जो भी सीखा, गुना सब मां की ही छत्र छाया है
**
अपना सुख छोड़ सदा, बच्चों के हित जीती है
ऐसा लगता कभी नहीं वो जीवन में थकती है
**
कितनी भी मुश्किल आए, हर पल उसका करे सामना
चाहे जैसी भी हो परिस्थिति, कभी नहीं देती उलाहना
**
अब जब समाज में एकल परिवार ही प्रचलन में है
मां की जिम्मेदारी और परवरिश ही एकमात्र संबल है
**
पूरे परिवार संग अब मां दोहरा दायित्व भी निभाती है
परिवार स्वस्थ और समर्थ हो सो कार्य छेत्र की जिम्मेदारी भी संभालती है
**
बेटा हो या बेटी अब मां की निगाहें और अधिक चौकन्नी होगी
समाज में स्वस्थ मानसिकता हो, अब इस बिंदु पर भी मां की पैनी नजर होगी
**
एक स्वस्थ समाज का ताना बाना,
नया सवेरा लाएगा
भारत का हर घर हर बच्चा, अपना वर्चस्व बताएगा
**
मां के रूप की हम सब वंदना करते हैं
धरती से आकाश तक मां की श्रेष्ठता सिद्ध करते हैं।

सरोज बाला सोनी
कवयित्री,

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *