Vijay Kumar
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साहित्य
मिट्टी का क़र्ज़
ये मिट्टी सिर्फ़ धूल नहीं, शहीदों का लहू हैहर कण में गूँजती भारत माँ की आबरू हैजिसे सींचा है पुरखों…
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साहित्य
याद बीते दिनों की
तेरे इन्तीज़ार की इन्तिहाँ हो गयीवो दरख्त सूख गया खड़े तेरे आस मे एक ज़िंदगी बीत गयी याद तेरे उन…
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साहित्य
धुएँ में लिखें नाम
धुएँ में लिखें नामकभी मुक्कमल नहीं होते,वे बस कुछ पल ठहरते हैं —फिर हवा की उंगलियांउन्हें अपने साथ बहा लें…
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साहित्य
माँ बाप भाई बहन
कोई नहीं है अपना रे बाबू कोई नहीं है अपनामाँ बाप भाई बहन सब बीवी बच्चे हैं एक सपनाधन दौलत…
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साहित्य
तमाशा
देख तमाशा दुनिया का।रिश्ते नातों के मेले का। खेल और खिलाड़ी का।कुश्ती और हॉकी के खेलों का।शतरंज की बाजी पलटने…
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साहित्य
नशे की गिरफ़्त में युवा भारत
आज नशे की गिरफ़्त में है युवा भारतयुवा के सपनों का श्मशान बनता भारतपहले जिन हाथों में कलम- किताबहोते थेआज…
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साहित्य
संस्कृति कर गई तार तार
कल शाम सूचना मिली ब्राह्मण समाज के पूर्व अध्यक्ष शर्मा जी नही रहेकल ही तो सुबह घूमते हुये पार्क में…
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साहित्य
मां का ममत्व
ममता की मधुरिम छाया है,माँ जीवन का आधार है,उसके आँचल की शीतलता,जग में सबसे प्यार है। खुद दुख सहकर हँसती…
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साहित्य
पिता
पिता, वरदान ईश का,होता बड़ा महान ।कड़वी औषधि नीम सा,घर की है मुस्कान ।पोषण करते एक सा,सबका रखते ध्यान।हो विशाल…
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साहित्य
गुलाम – ए- जन्नत
मैं उस रानी का ग़ुलाम हूँदुनिया जिसे माँ कहती है ना कोई तख़्त है उसके नामना हीरे जड़े ताज हैं…
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