Vijay Kumar
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साहित्य
हिन्दी मेरे देश की भाषा
विश्व हिन्दी दिवस हेतु हिन्दी मेरे देश की भाषा,देश को सबसे प्यारी है।हिल-मिलकर यह सबमें रहती,सारे जग में न्यारी है।।…
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साहित्य
क़र्म योग एवं आत्म-दर्शन
छिति, जल, पावक, गगन, समीर,पाँच तत्व मिल बना अग़म शरीर,सत, रज, तम गुण मानव तन के,मन रहता इनसे ही अति…
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साहित्य
माटी का ऋण
हे भारत माँ! तेरी माटी, माथे का अभिमान है,तेरे चरणों में अर्पित मेरा तन, मन और प्राण है।तेरी गोद में…
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साहित्य
प्रभाती वंदन के साथ चंद मुक्तक
ममता में मूरत है जिनकी, अवगुण सभी मिटाती हैं।नष्ट विकार हृदय का करती, पावन पुण्य जगाती हैं।जिस पर कृपा मातु…
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साहित्य
पद्म भूषण राजा डॉ. राधिकारमण प्रसाद सिंह जयंती को समर्पित रहा कल्प भेंटवार्ता मंच
कटिहार के उदीयमान साहित्यकार शशिधर कुमार भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित…
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साहित्य
चाय
विषय : गरीबीविधा : पद्य जब देखा बच्चा मैल कुचैल ,जा पूछा जीवन करीबी से ।कैसा जीवन का अभिशाप ,शिक्षा…
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साहित्य
मासूमियत
बच्चे हो या जवान बूढ़े हो या कुछ उम्रदराज जिनके चेहरे पर मासूमियत होता है,अक्सर नियत से साफ वही इंसान…
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साहित्य
संतुष्टि
संतोषम् परम् सुखम्, सत्य है ये उक्तिसुखी वही रहा जगत मे जिसको है संतुष्टिजो भी है,जैसे भी है,जितना है पास…
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साहित्य
कविता
कविताएँलिखना जरूरी हैक्योंकिउनमे संवेदनाओं की जमीन परफूटते है अंकुरये शब्दों की फसलइसलिए भी है जरूरीताकि बच सकेवजूदइंसानियत कासब कुछ खत्म…
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साहित्य
जिंदगी
जिंदगी है ,एक पागल की हंसी !एक कंगाल की मुट्ठी काबन्द एहसास !जिंदगी कुटिल द्रोणाचार्य है !और वक्त एककपटी बगुला…
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