Vijay Kumar
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साहित्य
मुझे बचाओ
दर्द की राहों में डूबा मन, हाँफ रहा टूटी सांसों में,टूटे सपने जलते भीतर, जैसे धुआँ हो आहों में। सूनी…
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साहित्य
कुछ लिखते हैं
विद्या – कविताशीर्षक – जिंदगी के खट्टे-मीठे रंग ज़िंदगी है एक सफ़र सुहाना,हर मोड़ पे इक नया तराना।कुछ धूप है…
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साहित्य
रांझणा…
बीच बजार हीर को ढूँढे—सुर में पीर समाए,हीर पुकारे—कहाँ चली तू, क्यों मुझको बीच में छोड़ जाए?मन तरसे, नयन बरसें—भीगी…
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साहित्य
मोक्ष के पथिक
“गाँव की साँसें और गंगाराम का नया दंश” हरिचरण को जब चौपाल से ले जाया जा रहा था,गाँव में एक…
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साहित्य
जूता काण्ड।।
हमारे भारत के सुप्रीम कोर्ट के ही अन्दर,माननीय सीजेआई पर जूता उछाला गया।सुप्रीम कोर्ट के ही ऐडवोकेट राकेश साहब ने,यह…
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साहित्य
संविधान दिवस
जिनकी कलम ने भारत के विधि का नया विधान लिखा,एक नए भारत के आगे बढने का संविधान लिखा,किस दिशा में…
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साहित्य
सोशल मीडिया के दौर में भारतीय संस्कृति
” सभ्यता, संस्कृति जहां से जन्मी हैवो हिंद देश मेरा मतवाला हैसंस्कार जहां से पले -बढ़ेवो भारत देश निराला है”वर्तमान…
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साहित्य
रूह की आवाज
मनुष्य का जीवन केवल बाहरी अनुभवों का संग्रह नहीं है, बल्कि भीतर घटने वाली एक अनंत यात्रा है। इस यात्रा…
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साहित्य
ख्वाब
ख्वाब अँधेरों में उगती किरण,मन में उजियारा भर जाते हैं।थकी निगाहों को सहलाकर,दिल में नई रोशनी जगाते हैं। कभी ये…
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साहित्य
इत्तेफाक से
आज इत्तेफ़ाक़ से जब वहसामने आए,हृदय स्पंदित हुआ, कदम कुछलड़खड़ाए।। लव थरथराए, नेत्र भी सजलहो गए,गिले–शिकवे भूल दोनोंन जाने कहाँ…
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