Vijay Kumar
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साहित्य
अंतहीन(कहानी)
पुराने समय की बात है। एक छोटे से गाँव में हरिदास नाम का कुम्हार रहता था। उसकी हथेलियाँ जीवन भर…
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साहित्य
तप
पुराने समय की बात है। सतयुग का समय था, जब राजाओं के भीतर भी ब्रह्मतेज की चाह जाग उठती थी।…
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साहित्य
सेवा और त्याग की सार्थकता
“सच्ची और सम्मान के लिए पैसे की नहींबल्कि सेवा और त्याग की जरूरत होती है”सेवा और त्याग, मनुष्य जीवन का…
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साहित्य
माँ का आंचल
माँ का साथ छुट हि गया।।।।भगवान हमसे रूठ ही गया।। माँ के आंचल से दूर हुए।।माँ के शोक में भाव…
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साहित्य
शीत ऋतु के स्वागत
रचनाकार – हरनारायण कुर्रे, मुड़पार चु,पो.रसौटा, तहसील पामगढ़, जिला जांजगीर चांपा (छत्तीसगढ़) श्रेणी – काव्य शीत ऋतु आई है द्वार…
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साहित्य
चेहरों के पीछे चेहरा
एक चेहरे पर कई चेहरा लगाए घूमते हैं लोग,सच को झूठा, झूठ को सच्चा बताते हैं लोग।यहाँ मुश्किल है इंसानों…
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साहित्य
माँ क्या वो नही है।
क्यूं कहते हो, कि हैं वो नही, वो हैं जो नही, क्यूं कहते हो ?दिखती तो बस इक देह ही…
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साहित्य
कविता
चांद ने था कुछ जो कहा,आसान नही था समझना,मैं बात समझता था रहा,पर प्यार नही था समझना।। वो रीत रखे…
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साहित्य
विश्वास क्यों जरूरी है?
आज के युग की यही कहानी,हर एक विश्वास की यही हे धुरी।जो सुना वो सच की बातें,यही हे अंधविश्वास की…
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साहित्य
हिन्दी भाषा का महत्व
उज्ज्वल भारत की अपनी, शुभ अभिलाषा हिन्दी है,बहुत सरल, मीठी-मीठी, दूध बताशा हिन्दी है।। अंग्रेजों की चालों से, बनी तमाशा…
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