Vijay Kumar
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साहित्य
नारी और मर्यादा
“पंखों में ही शक्ति है हौसलों से उड़ान होती हैजब भी आगे बढ़कर करती है कुछ कामहमेशा करते रहें नारी…
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साहित्य
सत्य मिथ्या गमन
सत्य गमने प्रकाश बना ,मिथ्या गमने बना अंधेर ।सत्य हेतु ही दिवा बना ,असत्य निशा कहे टेर ।।दिवा निशा मध्य…
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साहित्य
अक्षरों का वृक्ष — हिंदी
अक्षरों के वृक्ष से हीशब्दों की दुनिया सजती है,शब्द–ध्वनियां सुनकर हीज़िंदगी फिर सँवरती है।। इसकी छाँव तले मिलताज्ञान और संस्कार…
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साहित्य
बेचारा मोबाइल
यह सच है कि आजकल सारे रिश्तेबेचारे मोबाइल ढो रहे हैं ।बढ़ रही अपनों से दूरी औरअजनबी दूर वाले पास…
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साहित्य
पितृऋण
(१)माता-पिता का दिया प्यार है पितृऋण,इस जीवन का एक उपहार है पितृऋण।हर साँस का सच्चा आधार है पितृऋण,सबका उजियारा संसार…
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साहित्य
प्रगति के मोती
प्रगति पथ नित ध्यान रखें,आगे बढ़ते चले चले।प्रगति मानसिक रूपों में,वो भौतिक मन के स्वरूपों में। समृद्ध और साकार बनने,चारों…
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साहित्य
मीठी वाणी
हो मीठी वाणी सहज और सुंदर,मन को हर्षित करने वाली। भाव विभोर हो शीतल पावन ,वाणी से,नियमित बोलिये प्रेम की…
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साहित्य
क्या हिन्दी सनातन धर्म का आधार है?
पहली बात तो ये कि सनातन धर्म और हिन्दी ही हमें सिखाती है कि अपनी बात कहने के पहले शिष्टाचार…
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साहित्य
भटकन
प्रथम खण्ड : अधूरे घाव कुछ घाव ऐसे हैंजिन पर समय भी मरहम नहीं रखता।वे रिसते रहते हैं—जैसे इतिहास की…
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साहित्य
कुछ और है
जी हांखलबली मची है दिलोंके भीतर,पर मामला कुछ और है।।साहूकार ही बन बैठा हैआज चोर यहांजरा समझजाओ दुनिया वालोयहां मामला…
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